वाल्मीकि रामायणम्
युद्धकाण्डम्
Yuddha Kāṇḍa
१२८ सर्गाः · ५४४३ श्लोकाः
128 sargas · 5,443 ślokas
१
1
हनुमान्जीकी प्रशंसा करके श्रीरामका उन्हें हृदयसे लगाना और समुद्रको पार करनेके लिये चिन्तित होना
Sarga 1
२
2
सुग्रीवका श्रीरामको उत्साह प्रदान करना
Sarga 2
३
3
हनुमान्जीका लङ्काके दुर्ग, फाटक, सेना-विभाग और संक्रम आदिका वर्णन करके भगवान् श्रीरामसे सेनाको कूच करनेकी आज्ञा देनेके लिये प्रार्थना करना
Sarga 3
४
4
श्रीराम आदिके साथ वानर-सेनाका प्रस्थान और समुद्र-तटपर उसका पड़ाव
Sarga 4
५
5
श्रीरामका सीताके लिये शोक और विलाप
Sarga 5
६
6
रावणका कर्तव्य-निर्णयके लिये अपने मन्त्रियोंसे समुचित सलाह देनेका अनुरोध करना
Sarga 6
७
7
राक्षसोंका रावण और इन्द्रजित्के बल-पराक्रमका वर्णन करते हुए उसे रामपर विजय पानेका विश्वास दिलाना
Sarga 7
८
8
प्रहस्त, दुर्मुख, वज्रदंष्ट्र, निकुम्भ और वज्रहनुका रावणके सामने शत्रु-सेनाको मार गिरानेका उत्साह दिखाना
Sarga 8
९
9
विभीषणका रावणसे श्रीरामकी अजेयता बताकर सीताको लौटा देनेके लिये अनुरोध करना
Sarga 9
१०
10
विभीषणका रावणके महलमें जाना, उसे अपशकुनोंका भय दिखाकर सीताको लौटा देनेके लिये प्रार्थना करना और रावणका उनकी बात न मानकर उन्हें वहाँसे विदा कर देना
Sarga 10
११
11
रावण और उसके सभासदोंका सभाभवनमें एकत्र होना
Sarga 11
१२
12
नगरकी रक्षाके लिये सैनिकोंकी नियुक्ति, रावणका सीताके प्रति अपनी आसक्ति बताकर उनके हरणका प्रसंग बताना और भावी कर्तव्यके लिये सभासदोंकी सम्मति माँगना, कुम्भकर्णका पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओंके वधका स्वयं ही भार उठाना
Sarga 12
१३
13
महापार्श्वका रावणको सीतापर बलात्कारके लिये उकसाना और रावणका शापके कारण अपनेको ऐसा करनेमें असमर्थ बताना तथा अपने पराक्रमके गीत गाना
Sarga 13
१४
14
विभीषणका रामको अजेय बताकर उनके पास सीताको लौटा देनेकी सम्मति देना
Sarga 14
१५
15
इन्द्रजित्द्वारा विभीषणका उपहास तथा विभीषणका उसे फटकारकर सभामें अपनी उचित सम्मति देना
Sarga 15
१६
16
रावणके द्वारा विभीषणका तिरस्कार और विभीषणका भी उसे फटकारकर चल देना
Sarga 16
१७
17
विभीषणका श्रीरामकी शरणमें आना और श्रीरामका अपने मन्त्रियोंके साथ उन्हें आश्रय देनेके विषयमें विचार करना
Sarga 17
१८
18
भगवान् श्रीरामका शरणागतकी रक्षाका महत्त्व एवं अपना व्रत बताकर विभीषणसे मिलना
Sarga 18
१९
19
विभीषणका आकाशसे उतरकर भगवान् श्रीरामके चरणोंकी शरण लेना, उनके पूछनेपर रावणकी शक्तिका परिचय देना और श्रीरामका रावण-वधकी प्रतिज्ञा करके विभीषणको लङ्काके राज्यपर अभिषिक्त कर उनकी सम्मतिसे समुद्रतटपर धरना देनेके लिये बैठना
Sarga 19
२०
20
शार्दूलके कहनेसे रावणका शुकको दूत बनाकर सुग्रीवके पास संदेश भेजना, वहाँ वानरोंद्वारा उसकी दुर्दशा, श्रीरामकी कृपासे उसका संकटसे छूटना और सुग्रीवका रावणके लिये उत्तर देना
Sarga 20
२१
21
श्रीरामका समुद्रके तटपर कुशा बिछाकर तीन दिनोंतक धरना देनेपर भी समुद्रके दर्शन न देनेसे कुपित हो उसे बाण मारकर विक्षुब्ध कर देना
Sarga 21
२२
22
समुद्रकी सलाहके अनुसार नलके द्वारा सागरपर सौ योजन लंबे पुलका निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम आदिसहित वानरसेनाका उस पार पहुँचकर पड़ाव डालना
Sarga 22
२३
23
श्रीरामका लक्ष्मणसे उत्पातसूचक लक्षणोंका वर्णन और लङ्कापर आक्रमण
Sarga 23
२४
24
श्रीरामका लक्ष्मणसे लङ्काकी शोभाका वर्णन करके सेनाको व्यूहबद्ध खड़ी होनेके लिये आदेश देना, श्रीरामकी आज्ञासे बन्धनमुक्त हुए शुकका रावणके पास जाकर उनकी सैन्यशक्तिकी प्रबलता बताना तथा रावणका अपने बलकी डींग हाँकना
Sarga 24
२५
25
रावणका शुक और सारणको गुप्तरूपसे वानरसेनामें भेजना, विभीषणद्वारा उनका पकड़ा जाना, श्रीरामकी कृपासे छुटकारा पाना तथा श्रीरामका संदेश लेकर लङ्कामें लौटकर उनका रावणको समझाना
Sarga 25
२६
26
सारणका रावणको पृथक्-पृथक् वानरयूथपतियोंका परिचय देना
Sarga 26
२७
27
वानरसेनाके प्रधान यूथपतियोंका परिचय
Sarga 27
२८
28
शुकके द्वारा सुग्रीवके मन्त्रियोंका, मैन्द और द्विविदका, हनुमान्का, श्रीराम, लक्ष्मण, विभीषण और सुग्रीवका परिचय देकर वानरसेनाकी संख्याका निरूपण करना
Sarga 28
२९
29
रावणका शुक और सारणको फटकारकर अपने दरबारसे निकाल देना, उसके भेजे हुए गुप्तचरोंका श्रीरामकी दयासे वानरोंके चंगुलसे छूटकर लङ्कामें आना
Sarga 29
३०
30
रावणके भेजे हुए गुप्तचरों एवं शार्दूलका उससे वानर-सेनाका समाचार बताना और मुख्य-मुख्य वीरोंका परिचय देना
Sarga 30
३१
31
मायारचित श्रीरामका कटा मस्तक दिखाकर रावणद्वारा सीताको मोहमें डालनेका प्रयत्न
Sarga 31
३२
32
श्रीरामके मारे जानेका विश्वास करके सीताका विलाप तथा रावणका सभामें जाकर मन्त्रियोंके सलाहसे युद्धविषयक उद्योग करना
Sarga 32
३३
33
सरमाका सीताको सान्त्वना देना, रावणकी मायाका भेद खोलना, श्रीरामके आगमनका प्रिय समाचार सुनाना और उनके विजयी होनेका विश्वास दिलाना
Sarga 33
३४
34
सीताके अनुरोधसे सरमाका उन्हें मन्त्रियोंसहित रावणका निश्चित विचार बताना
Sarga 34
३५
35
माल्यवान्का रावणको श्रीरामसे संधि करनेके लिये समझाना
Sarga 35
३६
36
माल्यवान्पर आक्षेप और नगरकी रक्षाका प्रबन्ध करके रावणका अपने अन्तःपुरमें जाना
Sarga 36
३७
37
विभीषणका श्रीरामसे रावणद्वारा किये गये लङ्काकी रक्षाके प्रबन्धका वर्णन तथा श्रीरामद्वारा लङ्काके विभिन्न द्वारोंपर आक्रमण करनेके लिये अपने सेनापतियोंकी नियुक्ति
Sarga 37
३८
38
श्रीरामका प्रमुख वानरोंके साथ सुवेल पर्वतपर चढ़कर वहाँ रातमें निवास करना
Sarga 38
३९
39
वानरोंसहित श्रीरामका सुवेल-शिखरसे लङ्कापुरीका निरीक्षण करना
Sarga 39
४०
40
सुग्रीव और रावणका मल्लयुद्ध
Sarga 40
४१
41
सर्गः ४१
Sarga 41
४२
42
सर्गः ४२
Sarga 42
४३
43
सर्गः ४३
Sarga 43
४४
44
सर्गः ४४
Sarga 44
४५
45
सर्गः ४५
Sarga 45
४६
46
सर्गः ४६
Sarga 46
४७
47
सर्गः ४७
Sarga 47
४८
48
सर्गः ४८
Sarga 48
४९
49
सर्गः ४९
Sarga 49
५०
50
सर्गः ५०
Sarga 50
५१
51
सर्गः ५१
Sarga 51
५२
52
सर्गः ५२
Sarga 52
५३
53
सर्गः ५३
Sarga 53
५४
54
सर्गः ५४
Sarga 54
५५
55
सर्गः ५५
Sarga 55
५६
56
सर्गः ५६
Sarga 56
५७
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सर्गः ५७
Sarga 57
५८
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सर्गः ५८
Sarga 58
५९
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सर्गः ५९
Sarga 59
६०
60
सर्गः ६०
Sarga 60
६१
61
सर्गः ६१
Sarga 61
६२
62
सर्गः ६२
Sarga 62
६३
63
सर्गः ६३
Sarga 63
६४
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सर्गः ६४
Sarga 64
६५
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सर्गः ६५
Sarga 65
६६
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सर्गः ६६
Sarga 66
६७
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सर्गः ६७
Sarga 67
६८
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सर्गः ६८
Sarga 68
६९
69
सर्गः ६९
Sarga 69
७०
70
सर्गः ७०
Sarga 70
७१
71
सर्गः ७१
Sarga 71
७२
72
सर्गः ७२
Sarga 72
७३
73
सर्गः ७३
Sarga 73
७४
74
सर्गः ७४
Sarga 74
७५
75
सर्गः ७५
Sarga 75
७६
76
सर्गः ७६
Sarga 76
७७
77
सर्गः ७७
Sarga 77
७८
78
सर्गः ७८
Sarga 78
७९
79
सर्गः ७९
Sarga 79
८०
80
सर्गः ८०
Sarga 80
८१
81
सर्गः ८१
Sarga 81
८२
82
सर्गः ८२
Sarga 82
८३
83
सर्गः ८३
Sarga 83
८४
84
सर्गः ८४
Sarga 84
८५
85
सर्गः ८५
Sarga 85
८६
86
सर्गः ८६
Sarga 86
८७
87
सर्गः ८७
Sarga 87
८८
88
सर्गः ८८
Sarga 88
८९
89
सर्गः ८९
Sarga 89
९०
90
सर्गः ९०
Sarga 90
९१
91
सर्गः ९१
Sarga 91
९२
92
सर्गः ९२
Sarga 92
९३
93
सर्गः ९३
Sarga 93
९४
94
सर्गः ९४
Sarga 94
९५
95
सर्गः ९५
Sarga 95
९६
96
सर्गः ९६
Sarga 96
९७
97
सर्गः ९७
Sarga 97
९८
98
सर्गः ९८
Sarga 98
९९
99
सर्गः ९९
Sarga 99
१००
100
सर्गः १००
Sarga 100
१०१
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सर्गः १०१
Sarga 101
१०२
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सर्गः १०२
Sarga 102
१०३
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सर्गः १०३
Sarga 103
१०४
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सर्गः १०४
Sarga 104
१०५
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सर्गः १०५
Sarga 105
१०६
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सर्गः १०६
Sarga 106
१०७
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सर्गः १०७
Sarga 107
१०८
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सर्गः १०८
Sarga 108
१०९
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सर्गः १०९
Sarga 109
११०
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सर्गः ११०
Sarga 110
१११
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सर्गः १११
Sarga 111
११२
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सर्गः ११२
Sarga 112
११३
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सर्गः ११३
Sarga 113
११४
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सर्गः ११४
Sarga 114
११५
115
सर्गः ११५
Sarga 115
११६
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सर्गः ११६
Sarga 116
११७
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सर्गः ११७
Sarga 117
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सर्गः ११८
Sarga 118
११९
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सर्गः ११९
Sarga 119
१२०
120
सर्गः १२०
Sarga 120
१२१
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सर्गः १२१
Sarga 121
१२२
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सर्गः १२२
Sarga 122
१२३
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सर्गः १२३
Sarga 123
१२४
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सर्गः १२४
Sarga 124
१२५
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सर्गः १२५
Sarga 125
१२६
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सर्गः १२६
Sarga 126
१२७
127
सर्गः १२७
Sarga 127
१२८
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सर्गः १२८
Sarga 128