हनुमान्जीका श्रीरामको सीताका समाचार सुनाना
tataḥ prasravaṇaṁ śailaṁ te gatvā citrakānanam।
praṇamya śirasā rāmaṁ lakṣmaṇaṁ ca mahābalam॥
संयुक्त अनुवाद ↓joint translation ↓
yuvarājaṁ puraskṛtya sugrīvamabhivādya ca।
pravṛttimatha sītāyāḥ pravaktumupacakramuḥ॥
तदनन्तर विचित्र काननों से सुशोभित प्रस्रवण पर्वत पर जाकर युवराज अङ्गद को आगे करके श्रीराम, महाबली लक्ष्मण तथा सुग्रीव को मस्तक झुकाकर प्रणाम करने के अनन्तर सब वानरों ने सीता का समाचार बताना आरम्भ किया—
English translation coming soon.
rāvaṇāntaḥpure rodhaṁ rākṣasībhiśca tarjanam।
rāme samanurāgaṁ ca yathā ca niyamaḥ kṛtaḥ॥
संयुक्त अनुवाद ↓joint translation ↓
etadākhyāya te sarvaṁ harayo rāmasaṁnidhau।
vaidehīmakṣatāṁ śrutvā rāmastūttaramabravīt॥
‘सीता देवी रावण के अन्तःपुर में रोक रखी गयी हैं। राक्षसियाँ उन्हें धमकाती रहती हैं। श्रीराम के प्रति उनका अनन्य अनुराग है। रावण ने सीता के जीवित रहने के लिये केवल दो मास की अवधि दे रखी है। इस समय विदेह-कुमारी को कोई क्षति नहीं पहुँची है—वे सकुशल हैं।’ श्रीरामचन्द्रजी के निकट ये सब बातें बताकर वे वानर चुप हो गये। विदेहकुमारी के सकुशल होने का वृत्तान्त सुनकर श्रीराम ने आगे की बात पूछते हुए कहा—
English translation coming soon.
kva sītā vartate devī kathaṁ ca mayi vartate।
etanme sarvamākhyāta vaidehīṁ prati vānarāḥ॥
‘वानरो! देवी सीता कहाँ हैं? मेरे प्रति उनका कैसा भाव है? विदेहकुमारी के विषय में ये सारी बातें मुझसे कहो’
English translation coming soon.
rāmasya gaditaṁ śrutvā harayo rāmasaṁnidhau।
codayanti hanūmantaṁ sītāvṛttāntakovidam॥
श्रीरामचन्द्रजी का यह कथन सुनकर वे वानर श्रीराम के निकट सीता के वृत्तान्त को अच्छी तरह जाननेवाले हनुमान्जी को उत्तर देने के लिये प्रेरित करने लगे
English translation coming soon.
śrutvā tu vacanaṁ teṣāṁ hanūmān mārutātmajaḥ।
praṇamya śirasā devyai sītāyai tāṁ diśaṁ prati॥
उन वानरों की बात सुनकर पवनपुत्र हनुमान्जी ने पहले देवी सीता के उद्देश्य से दक्षिण दिशा की ओर मस्तक झुकाकर प्रणाम किया
English translation coming soon.
uvāca vākyaṁ vākyajñaḥ sītāyā darśanaṁ yathā।
taṁ maṇiṁ kāñcanaṁ divyaṁ dīpyamānaṁ svatejasā॥
dattvā rāmāya hanumāṁstataḥ prāñjalirabravīt।
फिर बातचीत की कला को जाननेवाले उन वानरवीर ने सीताजी का दर्शन जिस प्रकार हुआ था, वह सारा वृत्तान्त कह सुनाया। तत्पश्चात् अपने तेज से प्रकाशित होनेवाली उस दिव्य काञ्चनमणि को भगवान् श्रीराम के हाथ में देकर हनुमान्जी हाथ जोड़कर बोले—
English translation coming soon.
samudraṁ laṅghayitvāhaṁ śatayojanamāyatam॥
agacchaṁ jānakīṁ sītāṁ mārgamāṇo didṛkṣayā।
‘प्रभो! मैं जनकनन्दिनी सीता के दर्शन की इच्छा से उनका पता लगाता हुआ सौ योजन विस्तृत समुद्र को लाँघकर उसके दक्षिण किनारे पर जा पहुँचा
English translation coming soon.
tatra laṅketi nagarī rāvaṇasya durātmanaḥ॥
dakṣiṇasya samudrasya tīre vasati dakṣiṇe।
‘वहीं दुरात्मा रावण की नगरी लङ्का है। वह समुद्र के दक्षिण तट पर ही बसी हुई है
English translation coming soon.
tatra sītā mayā dṛṣṭā rāvaṇāntaḥpure satī॥
संयुक्त अनुवाद ↓joint translation ↓
tvayi saṁnyasya jīvantī rāmā rāma manoratham।
dṛṣṭā me rākṣasīmadhye tarjyamānā muhurmuhuḥ॥
rākṣasībhirvirūpābhī rakṣitā pramadāvane।
‘श्रीराम! लङ्का में पहुँचकर मैंने रावण के अन्तःपुर में प्रमदावन के भीतर राक्षसियों के बीच में बैठी हुई सती-साध्वी सुन्दरी देवी सीता का दर्शन किया। वे अपनी सारी अभिलाषाओं को आपमें ही केन्द्रित करके किसी तरह जीवन धारण कर रही हैं। विकराल रूपवाली राक्षसियाँ उनकी रखवाली करती हैं और बारंबार उन्हें डाँटती-फटकारती रहती हैं
English translation coming soon.
duḥkhamāpadyate devī tvayā vīra sukhocitā॥
संयुक्त अनुवाद ↓joint translation ↓
rāvaṇāntaḥpure ruddhā rākṣasībhiḥ surakṣitā।
ekaveṇīdharā dīnā tvayi cintāparāyaṇā॥
‘वीरवर! देवी सीता आपके साथ सुख भोगने के योग्य हैं, परंतु इस समय बड़े दुःख से दिन बिता रही हैं। उन्हें रावण के अन्तःपुर में रोक रखा गया है और वे राक्षसियों के पहरे में रहती हैं। सिर पर एक वेणी धारण किये दुःखी हो सदा आपकी चिन्ता में डूबी रहती हैं
English translation coming soon.
adhaḥśayyā vivarṇāṅgī padminīva himāgame।
rāvaṇād vinivṛttārthā martavyakṛtaniścayā॥
‘वे नीचे भूमि पर सोती हैं। जैसे जाड़े के दिनों में पाला पड़ने के कारण कमलिनी सूख जाती है, उसी प्रकार उनके अङ्गों की कान्ति फीकी पड़ गयी है। रावण से उनका कोई प्रयोजन नहीं है। उन्होंने प्राण त्याग देने का निश्चय कर लिया है
English translation coming soon.
devī kathaṁcit kākutstha tvanmanā mārgitā mayā।
ikṣvākuvaṁśavikhyātiṁ śanaiḥ kīrtayatānagha॥
संयुक्त अनुवाद ↓joint translation ↓
sā mayā naraśārdūla śanairviśvāsitā tadā।
tataḥ sambhāṣitā devī sarvamarthaṁ ca darśitā॥
‘ककुत्स्थकुलभूषण! उनका मन निरन्तर आपमें ही लगा रहता है। निष्पाप नरश्रेष्ठ! मैंने बड़ा प्रयत्न करके किसी तरह महारानी सीता का पता लगाया और धीरे-धीरे इक्ष्वाकुवंश की कीर्ति का वर्णन करते हुए किसी प्रकार उनके हृदय में अपने प्रति विश्वास उत्पन्न किया। तत्पश्चात् देवी से वार्तालाप करके मैंने यहाँ की सब बातें उन्हें बतलायीं
English translation coming soon.
rāmasugrīvasakhyaṁ ca śrutvā harṣamupāgatā।
niyataḥ samudācāro bhaktiścāsyāḥ sadā tvayi॥
‘आपकी सुग्रीव के साथ मित्रता का समाचार सुनकर उन्हें बड़ा हर्ष हुआ। उनका उच्चकोटि का आचार-विचार (पातिव्रत्य) सुदृढ़ है। वे सदा आपमें ही भक्ति रखती हैं
English translation coming soon.
evaṁ mayā mahābhāga dṛṣṭā janakanandinī।
ugreṇa tapasā yuktā tvadbhaktyā puruṣarṣabha॥
‘महाभाग! पुरुषोत्तम! इस प्रकार जनकनन्दिनी को मैंने आपकी भक्ति से प्रेरित होकर कठोर तपस्या करते देखा है
English translation coming soon.
abhijñānaṁ ca me dattaṁ yathāvṛttaṁ tavāntike।
citrakūṭe mahāprājña vāyasaṁ prati rāghava॥
‘महामते! रघुनन्दन! चित्रकूट में आपके पास देवी के रहते समय एक कौए को लेकर जो घटना घटित हुई थी, उस वृत्तान्त को उन्होंने पहचान के रूप में मुझसे कहा था
English translation coming soon.
vijñāpyaḥ punarapyeṣa rāmo vāyusuta tvayā।
akhilena yathā dṛṣṭamiti māmāha jānakī॥
ayaṁ cāsmai pradātavyo yatnāt suparirakṣitaḥ।
‘जानकीजी ने आते समय मुझसे कहा—‘वायुनन्दन! तुम यहाँ जैसी मेरी हालत देख चुके हो, वह सब भगवान् श्रीराम को बताना और इस मणि को बड़े यत्न से सुरक्षितरूप में ले जाकर उनके हाथ में देना
English translation coming soon.
bruvatā vacanānyevaṁ sugrīvasyopaśṛṇvataḥ॥
संयुक्त अनुवाद ↓joint translation ↓
eṣa cūḍāmaṇiḥ śrīmān mayā te yatnarakṣitaḥ।
manaḥśilāyāstilakaṁ tat smarasveti cābravīt॥
संयुक्त अनुवाद ↓joint translation ↓
eṣa niryātitaḥ śrīmān mayā te vārisambhavaḥ।
enaṁ dṛṣṭvā pramodiṣye vyasane tvāmivānagha॥
‘ऐसे समय में देना, जब कि सुग्रीव भी निकट बैठकर तुम्हारी कही हुई बातें सुन रहे हों। साथ ही मेरी ये बातें भी उनसे निवेदन करना—‘प्रभो! आपकी दी हुई यह कान्तिमती चूड़ामणि मैंने बड़े यत्न से सुरक्षित रखी थी। जल से प्रकट हुए इस दीप्तिमान् रत्न को मैंने आपकी सेवा में लौटाया है। निष्पाप रघुनन्दन! संकट के समय इसे देखकर मैं उसी प्रकार आनन्दमग्न हो जाती थी, जैसे आपके दर्शन से आनन्दित होती हूँ। आपने मेरे ललाट में जो मैनसिल का तिलक लगाया था, इसको स्मरण कीजिये।’ ये बातें जानकीजी ने कही थीं
English translation coming soon.
jīvitaṁ dhārayiṣyāmi māsaṁ daśarathātmaja।
ūrdhvaṁ māsānna jīveyaṁ rakṣasāṁ vaśamāgatā॥
‘उन्होंने यह भी कहा—‘दशरथनन्दन! मैं एक मास और जीवन धारण करूँगी। उसके बाद राक्षसों के वश में पड़कर प्राण त्याग दूँगी—किसी तरह जीवित नहीं रह सकूँगी’
English translation coming soon.
iti māmabravīt sītā kṛśāṅgī dharmacāriṇī।
rāvaṇāntaḥpure ruddhā mṛgīvotphullalocanā॥
‘इस प्रकार दुबले-पतले शरीरवाली धर्मपरायणा सीता ने मुझे आपसे कहने के लिये यह संदेश दिया था। वे रावण के अन्तःपुर में कैद हैं और भय के मारे आँख फाड़-फाड़कर इधर-उधर देखनेवाली हरिणी के समान वे सशङ्क दृष्टि से सब ओर देखा करती हैं
English translation coming soon.
etadeva mayā''khyātaṁ sarvaṁ rāghava yad yathā।
sarvathā sāgarajale saṁtāraḥ pravidhīyatām॥
‘रघुनन्दन! यही वहाँ का वृत्तान्त है, जो सबका-सब मैंने आपकी सेवा में निवेदन कर दिया। अब सब प्रकार से समुद्र को पार करने का प्रयत्न कीजिये’
English translation coming soon.
tau jātāśvāsau rājaputrau viditvā
taccābhijñānaṁ rāghavāya pradāya।
devyā cākhyātaṁ sarvamevānupūrvyād
vācā sampūrṇaṁ vāyuputraḥ śaśaṁsa॥
राजकुमार श्रीराम और लक्ष्मण को कुछ आश्वासन मिल गया, ऐसा जानकर तथा वह पहचान श्रीरघुनाथजी के हाथ में देकर वायुपुत्र हनुमान् ने देवी सीता की कही हुई सारी बातें क्रमशः अपनी वाणीद्वारा पूर्णरूप से कह सुनायीं
English translation coming soon.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे पञ्चषष्टितमः सर्गः॥ ६५ ॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें पैंसठवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ६५ ॥