वाल्मीकि रामायणम् · सुन्दरकाण्डम्Sundara Kāṇḍa

सुन्दरकाण्डम्Sundara Kāṇḍa

सर्गः २५ · २० श्लोकाःSarga 25 · 20 ślokas

राक्षसियोंकी बात माननेसे इनकार करके शोक-संतप्त सीताका विलाप करना

॥ ५ · २५ · १ ॥
अथ तासां वदन्तीनां परुषं दारुणं बहु। राक्षसीनामसौम्यानां रुरोद जनकात्मजा॥

atha tāsāṁ vadantīnāṁ paruṣaṁ dāruṇaṁ bahu।
rākṣasīnāmasaumyānāṁ ruroda janakātmajā॥

जब वे क्रूर राक्षसियाँ इस प्रकार की बहुत-सी कठोर एवं क्रूरतापूर्ण बातें कह रही थीं, उस समय जनकनन्दिनी सीता अधीर हो-होकर रो रही थीं

English translation coming soon.

॥ ५ · २५ · २ ॥
एवमुक्ता तु वैदेही राक्षसीभिर्मनस्विनी। उवाच परमत्रस्ता बाष्पगद्गदया गिरा॥

evamuktā tu vaidehī rākṣasībhirmanasvinī।
uvāca paramatrastā bāṣpagadgadayā girā॥

उन राक्षसियों के इस प्रकार कहने पर अत्यन्त भयभीत हुई मनस्विनी विदेहराजकुमारी सीता नेत्रों से आँसू बहाती गद्गद वाणी में बोलीं—

English translation coming soon.

॥ ५ · २५ · ३ ॥
मानुषी राक्षसस्य भार्या भवितुमर्हति। कामं खादत मां सर्वा करिष्यामि वो वचः॥

na mānuṣī rākṣasasya bhāryā bhavitumarhati।
kāmaṁ khādata māṁ sarvā na kariṣyāmi vo vacaḥ॥

‘राक्षसियो! मनुष्य की कन्या कभी राक्षस की भार्या नहीं हो सकती। तुम्हारा जी चाहे तो तुम सब लोग मिलकर मुझे खा जाओ, परंतु मैं तुम्हारी बात नहीं मानूँगी’

English translation coming soon.

॥ ५ · २५ · ४ ॥
सा राक्षसीमध्यगता सीता सुरसुतोपमा। शर्म लेभे शोकार्ता रावणेनेव भर्त्सिता॥

sā rākṣasīmadhyagatā sītā surasutopamā।
na śarma lebhe śokārtā rāvaṇeneva bhartsitā॥

राक्षसियों के बीच में बैठी हुई देवकन्या के समान सुन्दरी सीता रावण के द्वारा धमकायी जाने के कारण शोक से आर्त-सी होकर चैन नहीं पा रही थीं

English translation coming soon.

॥ ५ · २५ · ५ ॥
वेपते स्माधिकं सीता विशन्तीवाङ्गमात्मनः। वने यूथपरिभ्रष्टा मृगी कोकैरिवार्दिता॥

vepate smādhikaṁ sītā viśantīvāṅgamātmanaḥ।
vane yūthaparibhraṣṭā mṛgī kokairivārditā॥

जैसे वन में अपने यूथ से बिछुड़ी हुई मृगी भेड़ियों से पीड़ित होकर भय के मारे काँप रही हो, उसी प्रकार सीता जोर-जोर से काँप रही थीं और इस तरह सिकुड़ी जा रही थीं, मानो अपने अंगों में ही समा जायँगी

English translation coming soon.

॥ ५ · २५ · ६ ॥
सा त्वशोकस्य विपुलां शाखामालम्ब्य पुष्पिताम्। चिन्तयामास शोकेन भर्तारं भग्नमानसा॥

sā tvaśokasya vipulāṁ śākhāmālambya puṣpitām।
cintayāmāsa śokena bhartāraṁ bhagnamānasā॥

उनका मनोरथ भंग हो गया था। वे हताश-सी होकर अशोकवृक्ष की खिली हुई एक विशाल शाखा का सहारा ले शोक से पीड़ित हो अपने पतिदेव का चिन्तन करने लगीं

English translation coming soon.

॥ ५ · २५ · ७ ॥
सा स्नापयन्ती विपुलौ स्तनौ नेत्रजलस्रवैः। चिन्तयन्ती शोकस्य तदान्तमधिगच्छति॥

sā snāpayantī vipulau stanau netrajalasravaiḥ।
cintayantī na śokasya tadāntamadhigacchati॥

आँसुओं के प्रवाह से अपने स्थूल उरोजों का अभिषेक करती हुई वे चिन्ता में डूबी थीं और उस समय शोक का पार नहीं पा रही थीं

English translation coming soon.

॥ ५ · २५ · ८ ॥
सा वेपमाना पतिता प्रवाते कदली यथा। राक्षसीनां भयत्रस्ता विवर्णवदनाभवत्॥

sā vepamānā patitā pravāte kadalī yathā।
rākṣasīnāṁ bhayatrastā vivarṇavadanābhavat॥

प्रचण्ड वायु के चलने पर कम्पित होकर गिरे हुए केले के वृक्ष की भाँति वे राक्षसियों के भय से त्रस्त हो पृथ्वी पर गिर पड़ीं। उस समय उनके मुख की कान्ति फीकी पड़ गयी थी

English translation coming soon.

॥ ५ · २५ · ९ ॥
तस्याः सा दीर्घबहुला वेपन्त्याः सीतया तदा। ददृशे कम्पिता वेणी व्यालीव परिसर्पती॥

tasyāḥ sā dīrghabahulā vepantyāḥ sītayā tadā।
dadṛśe kampitā veṇī vyālīva parisarpatī॥

उस बेला में काँपती हुई सीता की विशाल एवं घनीभूत वेणी भी कम्पित हो रही थी, इसलिये वह रेंगती हुई सर्पिणी के समान दिखायी देती थी

English translation coming soon.

॥ ५ · २५ · १० ॥
सा निःश्वसन्ती शोकार्ता कोपोपहतचेतना। आर्ता व्यसृजदश्रूणि मैथिली विललाप च॥

sā niḥśvasantī śokārtā kopopahatacetanā।
ārtā vyasṛjadaśrūṇi maithilī vilalāpa ca॥

वे शोक से पीड़ित होकर लम्बी साँसें खींच रही थीं और क्रोध से अचेत-सी होकर आर्तभाव से आँसू बहा रही थीं। उस समय मिथिलेशकुमारी इस प्रकार विलाप करने लगीं—

English translation coming soon.

॥ ५ · २५ · ११ ॥
हा रामेति दुःखार्ता हा पुनर्लक्ष्मणेति च। हा श्वश्रूर्मम कौसल्ये हा सुमित्रेति भामिनी॥

hā rāmeti ca duḥkhārtā hā punarlakṣmaṇeti ca।
hā śvaśrūrmama kausalye hā sumitreti bhāminī॥

‘हा राम! हा लक्ष्मण! हा मेरी सासु कौसल्ये! हा आर्ये सुमित्रे! बारम्बार ऐसा कहकर दुःख से पीड़ित हुई भामिनी सीता रोने-बिलखने लगीं

English translation coming soon.

॥ ५ · २५ · १२ ॥
लोकप्रवादः सत्योऽयं पण्डितैः समुदाहृतः। अकाले दुर्लभो मृत्युः स्त्रिया वा पुरुषस्य वा॥

lokapravādaḥ satyo'yaṁ paṇḍitaiḥ samudāhṛtaḥ।
akāle durlabho mṛtyuḥ striyā vā puruṣasya vā॥

‘हाय! पण्डितों ने यह लोकोक्ति ठीक ही कही है कि ‘किसी भी स्त्री या पुरुष की मृत्यु बिना समय आये नहीं होती’

English translation coming soon.

॥ ५ · २५ · १३ ॥
यत्राहमाभिः क्रूराभी राक्षसीभिरिहार्दिता। जीवामि हीना रामेण मुहूर्तमपि दुःखिता॥

yatrāhamābhiḥ krūrābhī rākṣasībhirihārditā।
jīvāmi hīnā rāmeṇa muhūrtamapi duḥkhitā॥

‘तभी तो मैं श्रीराम के दर्शन से वञ्चित तथा इन क्रूर राक्षसियोंद्वारा पीड़ित होने पर भी यहाँ मुहूर्तभर भी जी रही हूँ

English translation coming soon.

॥ ५ · २५ · १४ ॥
एषाल्पपुण्या कृपणा विनशिष्याम्यनाथवत्। समुद्रमध्ये नौः पूर्णा वायुवेगैरिवाहता॥

eṣālpapuṇyā kṛpaṇā vinaśiṣyāmyanāthavat।
samudramadhye nauḥ pūrṇā vāyuvegairivāhatā॥

‘मैंने पूर्वजन्म में बहुत थोड़े पुण्य किये थे, इसीलिये इस दीन दशा में पड़कर मैं अनाथ की भाँति मारी जाऊँगी। जैसे समुद्र के भीतर सामान से भरी हुई नौका वायु के वेग से आहत हो डूब जाती है, उसी प्रकार मैं भी नष्ट हो जाऊँगी

English translation coming soon.

॥ ५ · २५ · १५ ॥
भर्तारं तमपश्यन्ती राक्षसीवशमागता। सीदामि खलु शोकेन कूलं तोयहतं यथा॥

bhartāraṁ tamapaśyantī rākṣasīvaśamāgatā।
sīdāmi khalu śokena kūlaṁ toyahataṁ yathā॥

‘मुझे पतिदेव के दर्शन नहीं हो रहे हैं। मैं इन राक्षसियों के चंगुल में फँस गयी हूँ और पानी के थपेड़ों से आहत हो कटते हुए कगारों के समान शोक से क्षीण होती जा रही हूँ

English translation coming soon.

॥ ५ · २५ · १६ ॥
तं पद्मदलपत्राक्षं सिंहविक्रान्तगामिनम्। धन्याः पश्यन्ति मे नाथं कृतज्ञं प्रियवादिनम्॥

taṁ padmadalapatrākṣaṁ siṁhavikrāntagāminam।
dhanyāḥ paśyanti me nāthaṁ kṛtajñaṁ priyavādinam॥

‘आज जिन लोगों को सिंह के समान पराक्रमी और सिंह की-सी चालवाले मेरे कमलदललोचन, कृतज्ञ और प्रियवादी प्राणनाथ के दर्शन हो रहे हैं, वे धन्य हैं

English translation coming soon.

॥ ५ · २५ · १७ ॥
सर्वथा तेन हीनाया रामेण विदितात्मना। तीक्ष्णं विषमिवास्वाद्य दुर्लभं मम जीवनम्॥

sarvathā tena hīnāyā rāmeṇa viditātmanā।
tīkṣṇaṁ viṣamivāsvādya durlabhaṁ mama jīvanam॥

‘उन आत्मज्ञानी भगवान् श्रीराम से बिछुड़कर मेरा जीवित रहना उसी तरह सर्वथा दुर्लभ है, जैसे तेज विष का पान करके किसीका भी जीना अत्यन्त कठिन हो जाता है

English translation coming soon.

॥ ५ · २५ · १८ ॥
कीदृशं तु महापापं मया देहान्तरे कृतम्। तेनेदं प्राप्यते घोरं महादुःखं सुदारुणम्॥

kīdṛśaṁ tu mahāpāpaṁ mayā dehāntare kṛtam।
tenedaṁ prāpyate ghoraṁ mahāduḥkhaṁ sudāruṇam॥

‘पता नहीं, मैंने पूर्वजन्म में दूसरे शरीर से कैसा महान् पाप किया था, जिससे यह अत्यन्त कठोर, घोर और महान् दुःख मुझे प्राप्त हुआ है?

English translation coming soon.

॥ ५ · २५ · १९ ॥
जीवितं त्यक्तुमिच्छामि शोकेन महता वृता। राक्षसीभिश्च रक्षन्त्या रामो नासाद्यते मया॥

jīvitaṁ tyaktumicchāmi śokena mahatā vṛtā।
rākṣasībhiśca rakṣantyā rāmo nāsādyate mayā॥

‘इन राक्षसियों के संरक्षण में रहकर तो मैं अपने प्राणाराम श्रीराम को कदापि नहीं पा सकती, इसलिये महान् शोक से घिर गयी हूँ और इससे तंग आकर अपने जीवन का अन्त कर देना चाहती हूँ

English translation coming soon.

॥ ५ · २५ · २० ॥
धिगस्तु खलु मानुष्यं धिगस्तु परवश्यताम्। शक्यं यत् परित्यक्तुमात्मच्छन्देन जीवितम्॥

dhigastu khalu mānuṣyaṁ dhigastu paravaśyatām।
na śakyaṁ yat parityaktumātmacchandena jīvitam॥

‘इस मानव-जीवन और परतन्त्रता को धिक्कार है, जहाँ अपनी इच्छा के अनुसार प्राणों का परित्याग भी नहीं किया जा सकता’

English translation coming soon.

इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे पञ्चविंशः सर्गः॥ २५ ॥

इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें पचीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ २५ ॥