वाल्मीकि रामायणम् · बालकाण्डम्Bāla Kāṇḍa

बालकाण्डम्Bāla Kāṇḍa

सर्गः ५४ · २३ श्लोकाःSarga 54 · 23 ślokas

विश्वामित्रका वसिष्ठजीकी गौको बलपूर्वक ले जाना, गौका दुःखी होकर वसिष्ठजीसे इसका कारण पूछना और उनकी आज्ञासे शक, यवन, पह्लव आदि वीरोंकी सृष्टि करके उनके द्वारा विश्वामित्रजीकी सेनाका संहार करना

शबला की सेना

“शबला की सेना”
॥ १ · ५४ · १७–२० ॥

वसिष्ठस्य आज्ञया हुंकुर्वती शबला स्वशरीरात् सुवर्णवर्णान् वीरान् सृजति, ये विश्वामित्रसेनां विनाशयन्ति; अग्रे हतयोद्धाः शेरते, पार्श्वे शान्तः वसिष्ठः तिष्ठति।

वसिष्ठ की आज्ञा पाकर हुंकार करती हुई शबला गौ अपने तेज से सुनहरे शरीरवाले वीरों की सेना उत्पन्न कर रही है, जो सुनहरी प्रभा के साथ फूट पड़ते हैं और विश्वामित्र की सेना को रौंद रहे हैं; आगे कटे-मरे योद्धा पड़े हैं और बायीं ओर कमण्डलु लिये शान्त महर्षि वसिष्ठ खड़े हैं।

At Vasishtha's command the cow Shabala, bellowing, pours from her body an army of golden-hued warriors who burst forth in radiance and overwhelm Vishvamitra's troops; fallen soldiers lie in the foreground while the calm, kamandalu-bearing sage stands to the left.

॥ १ · ५४ · १ ॥
कामधेनुं वसिष्ठोऽपि यदा त्यजते मुनिः तदास्य शबलां राम विश्वामित्रोऽन्वकर्षत

kāmadhenuṁ vasiṣṭho'pi yadā na tyajate muniḥ ।
tadāsya śabalāṁ rāma viśvāmitro'nvakarṣata ॥

'श्रीराम! जब वसिष्ठ मुनि किसी तरह भी उस कामधेनु गौ को देने के लिये तैयार न हुए, तब राजा विश्वामित्र उस चितकबरे रंग की धेनु को बलपूर्वक घसीट ले चले।

English translation coming soon.

॥ १ · ५४ · २ ॥
नीयमाना तु शबला राम राज्ञा महात्मना दुःखिता चिन्तयामास रुदन्ती शोककर्शिता

nīyamānā tu śabalā rāma rājñā mahātmanā ।
duḥkhitā cintayāmāsa rudantī śokakarśitā ॥

'रघुनन्दन! महामनस्वी राजा विश्वामित्र के द्वारा इस प्रकार ले जायी जाती हुई वह शोकाकुल हो मन-ही-मन रो पड़ी और अत्यन्त दुःखित हो विचार करने लगी—

English translation coming soon.

॥ १ · ५४ · ३ ॥
परित्यक्ता वसिष्ठेन किमहं सुमहात्मना याहं राजभृतैर्दीना ह्रियेय भृशदुःखिता

parityaktā vasiṣṭhena kimahaṁ sumahātmanā ।
yāhaṁ rājabhṛtairdīnā hriyeya bhṛśaduḥkhitā ॥

'अहो! क्या महात्मा वसिष्ठ ने मुझे त्याग दिया है, जो ये राजा के सिपाही मुझ दीन और अत्यन्त दुःखित गौ को इस तरह बलपूर्वक लिये जा रहे हैं?

English translation coming soon.

॥ १ · ५४ · ४ ॥
किं मयापकृतं तस्य महर्षेर्भावितात्मनः यन्मामनागसं दृष्ट्वा भक्तां त्यजति धार्मिकः

kiṁ mayāpakṛtaṁ tasya maharṣerbhāvitātmanaḥ ।
yanmāmanāgasaṁ dṛṣṭvā bhaktāṁ tyajati dhārmikaḥ ॥

'पवित्र अन्तःकरणवाले उन महर्षि का मैंने क्या अपराध किया है कि वे धर्मात्मा मुनि मुझे निरपराध और अपना भक्त जानकर भी त्याग रहे हैं?'

English translation coming soon.

॥ १ · ५४ · ५ ॥
इति संचिन्तयित्वा तु निःश्वस्य पुनः पुनः जगाम वेगेन तदा वसिष्ठं परमौजसम्

iti saṁcintayitvā tu niḥśvasya ca punaḥ punaḥ ।
jagāma vegena tadā vasiṣṭhaṁ paramaujasam ॥

'शत्रुसूदन! यह सोचकर वह गौ बारम्बार लंबी साँस लेने लगी और राजा के उन सैकड़ों सेवकों को झटककर उस समय महातेजस्वी वसिष्ठ मुनि के पास बड़े वेग से जा पहुँची।

English translation coming soon.

॥ १ · ५४ · ६ ॥
निर्धूय तांस्तदा भृत्यान् शतशः शत्रुसूदन जगामानिलवेगेन पादमूलं महात्मनः

nirdhūya tāṁstadā bhṛtyān śataśaḥ śatrusūdana ।
jagāmānilavegena pādamūlaṁ mahātmanaḥ ॥

संयुक्त अनुवाद ↓joint translation ↓

॥ १ · ५४ · ७ ॥
शबला सा रुदन्ती क्रोशन्ती चेदमब्रवीत् वसिष्ठस्याग्रतः स्थित्वा रुदन्ती मेघनिःस्वना

śabalā sā rudantī ca krośantī cedamabravīt ।
vasiṣṭhasyāgrataḥ sthitvā rudantī meghaniḥsvanā ॥

॥ ६–७ ॥

'वह शबला गौ वायु के समान वेग से उन महात्मा के चरणों के समीप गयी और उनके सामने खड़ी हो मेघ के समान गम्भीर स्वर से रोती-चीखार करती हुई उनसे इस प्रकार बोली—

English translation coming soon.

॥ १ · ५४ · ८ ॥
भगवन् किं परित्यक्ता त्वयाहं ब्रह्मणः सुत यस्माद् राजभटा मां हि नयन्ते त्वत्सकाशतः

bhagavan kiṁ parityaktā tvayāhaṁ brahmaṇaḥ suta ।
yasmād rājabhaṭā māṁ hi nayante tvatsakāśataḥ ॥

'भगवन्! ब्रह्मकुमार! क्या आपने मुझे त्याग दिया, जो ये राजा के सैनिक मुझे आपके पास से दूर लिये जा रहे हैं?'

English translation coming soon.

॥ १ · ५४ · ९ ॥
एवमुक्तस्तु ब्रह्मर्षिरिदं वचनमब्रवीत् शोकसंतप्तहृदयां स्वसारमिव दुःखिताम्

evamuktastu brahmarṣiridaṁ vacanamabravīt ।
śokasaṁtaptahṛdayāṁ svasāramiva duḥkhitām ॥

'उसके ऐसा कहने पर ब्रह्मर्षि वसिष्ठ शोक से संतप्त हृदयवाली दुःखिया बहिन के समान उस गौ से इस प्रकार बोले—

English translation coming soon.

॥ १ · ५४ · १० ॥
त्वां त्यजामि शबले नापि मेऽपकृतं त्वया एष त्वां नयते राजा बलान्मत्तो महाबल

na tvāṁ tyajāmi śabale nāpi me'pakṛtaṁ tvayā ।
eṣa tvāṁ nayate rājā balānmatto mahābala ॥

'शबले! मैं तुम्हारा त्याग नहीं करता। तुमने मेरा कोई अपराध नहीं किया है। ये महाबली राजा अपने बल से मतवाले होकर तुमको मुझसे छीनकर लिये जा रहे हैं।

English translation coming soon.

॥ १ · ५४ · ११ ॥
नहि तुल्यं बलं मह्यं राजा त्वद्य विशेषतः बली राजा क्षत्रियश्च पृथिव्याः पतिरेव

nahi tulyaṁ balaṁ mahyaṁ rājā tvadya viśeṣataḥ ।
balī rājā kṣatriyaśca pṛthivyāḥ patireva ca ॥

'मेरा बल इनके समान नहीं है। विशेषतः आजकल ये राजा पदपर प्रतिष्ठित हैं। राजा, क्षत्रिय तथा इस पृथ्वी के पालक होने के कारण ये बलवान् हैं।

English translation coming soon.

॥ १ · ५४ · १२ ॥
इयमक्षौहिणी पूर्णा गजवाजिरथाकुला हस्तिध्वजसमाकीर्णा तेनासौ बलवत्तरः

iyamakṣauhiṇī pūrṇā gajavājirathākulā ।
hastidhvajasamākīrṇā tenāsau balavattaraḥ ॥

'इनके पास हाथी, घोड़े और रथों से भरी हुई एक अक्षौहिणी सेना है, जिसमें हाथियों के हौदों पर लगे हुए ध्वज सब ओर फहरा रहे हैं। इस सेना के कारण भी ये मुझसे प्रबल हैं।'

English translation coming soon.

॥ १ · ५४ · १३ ॥
एवमुक्ता वसिष्ठेन प्रत्युवाच विनीतवत् वचनं वचनज्ञा सा ब्रह्मर्षिमतुलप्रभम्

evamuktā vasiṣṭhena pratyuvāca vinītavat ।
vacanaṁ vacanajñā sā brahmarṣimatulaprabham ॥

वसिष्ठजी के ऐसा कहने पर बातचीत के मर्म को समझनेवाली उस कामधेनु ने उन अनुपम तेजस्वी ब्रह्मर्षि से यह विनययुक्त बात कही—

English translation coming soon.

॥ १ · ५४ · १४ ॥
बलं क्षत्रियस्याहुर्ब्राह्मणा बलवत्तराः ब्रह्मन् ब्रह्मबलं दिव्यं क्षात्राच्च बलवत्तरम्

na balaṁ kṣatriyasyāhurbrāhmaṇā balavattarāḥ ।
brahman brahmabalaṁ divyaṁ kṣātrācca balavattaram ॥

'ब्रह्मन्! क्षत्रिय का बल कोई बल नहीं है। ब्राह्मण ही क्षत्रिय आदि से अधिक बलवान् होते हैं। ब्राह्मण का बल दिव्य है। वह क्षत्रिय-बल से अधिक प्रबल होता है।

English translation coming soon.

॥ १ · ५४ · १५ ॥
अप्रमेयं बलं तुभ्यं त्वया बलवत्तरः विश्वामित्रो महावीर्यस्तेजस्तव दुरासदम्

aprameyaṁ balaṁ tubhyaṁ na tvayā balavattaraḥ ।
viśvāmitro mahāvīryastejastava durāsadam ॥

'आपका बल अप्रमेय है। महापराक्रमी विश्वामित्र आपसे अधिक बलवान् नहीं हैं। आपका तेज दुर्धर्ष है।

English translation coming soon.

॥ १ · ५४ · १६ ॥
नियुङ्क्ष्व मां महातेजस्त्वब्रह्मबलसम्भृताम् तस्य दर्पं बलं यज्ञं नाशयामि दुरात्मनः

niyuṅkṣva māṁ mahātejastvabrahmabalasambhṛtām ।
tasya darpaṁ balaṁ yajñaṁ nāśayāmi durātmanaḥ ॥

'महातेजस्वी महर्षे! मैं आपके ब्रह्मबल से परिपुष्ट हूँ। अतः आप केवल मुझे आज्ञा दे दीजिये। मैं इस दुरात्मा राजा के बल, प्रयत्न और अभिमान को अभी चूर्ण किये देती हूँ।'

English translation coming soon.

॥ १ · ५४ · १७ ॥
इत्युक्तस्तु तया राम वसिष्ठस्तु महायशाः सृजस्वेति तदोवाच बलं परबलार्दनम्

ityuktastu tayā rāma vasiṣṭhastu mahāyaśāḥ ।
sṛjasveti tadovāca balaṁ parabalārdanam ॥

श्रीराम! कामधेनु के ऐसा कहने पर महायशस्वी वसिष्ठ ने कहा—'इस शत्रु-सेना को नष्ट करनेवाले सैनिकों की सृष्टि करो।'

English translation coming soon.

॥ १ · ५४ · १८ ॥
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा सुरभिः सासृजत् तदा तस्या हुंभारवोत्सृष्टाः पह्लवाः शतशो नृप

tasya tad vacanaṁ śrutvā surabhiḥ sāsṛjat tadā ।
tasyā huṁbhāravotsṛṣṭāḥ pahlavāḥ śataśo nṛpa ॥

'राजकुमार! उनका वह आदेश सुनकर उस गौ ने वैसा ही किया। उसके हुंकार करते ही सैकड़ों पह्लव जाति के वीर पैदा हो गये।

English translation coming soon.

॥ १ · ५४ · १९ ॥
नाशयन्ति बलं सर्वं विश्वामित्रस्य पश्यतः राजा परमक्रुद्धः क्रोधविस्फारितेक्षणः

nāśayanti balaṁ sarvaṁ viśvāmitrasya paśyataḥ ।
sa rājā paramakruddhaḥ krodhavisphāritekṣaṇaḥ ॥

'वे सब विश्वामित्र के देखते-देखते उनकी सारी सेना का नाश करने लगे। इससे राजा विश्वामित्र को बड़ा क्रोध हुआ। वे रोष से आँखें फाड़-फाड़कर देखने लगे।

English translation coming soon.

॥ १ · ५४ · २० ॥
पह्लवान् नाशयामास शस्त्रैरुच्चावचैरपि विश्वामित्रार्दितान् दृष्ट्वा पह्लवान् शतशस्तदा

pahlavān nāśayāmāsa śastrairuccāvacairapi ।
viśvāmitrārditān dṛṣṭvā pahlavān śataśastadā ॥

संयुक्त अनुवाद ↓joint translation ↓

॥ १ · ५४ · २१ ॥
भूय एवासृजद् घोरान् शकान् यवनमिश्रितान् तैरासीत् संवृता भूमिः शकैर्यवनमिश्रितैः

bhūya evāsṛjad ghorān śakān yavanamiśritān ।
tairāsīt saṁvṛtā bhūmiḥ śakairyavanamiśritaiḥ ॥

॥ २०–२१ ॥

'उन्होंने छोटे-बड़े कई तरह के अस्त्रों का प्रयोग करके उन पह्लवों का संहार कर डाला। विश्वामित्रद्वारा उन सैकड़ों पह्लवों को पीड़ित एवं नष्ट हुआ देख उस समय उस शबला गौ ने पुनः यवनमिश्रित शक जाति के भयंकर वीरों को उत्पन्न किया। उन यवनमिश्रित शकों से वहाँ की सारी पृथ्वी भर गयी।

English translation coming soon.

॥ १ · ५४ · २२ ॥
प्रभाविद्भिर्महावीर्यैर्हेमकिञ्जल्कसंनिभैः तीक्ष्णासिपट्टिशधरैर्हेमवर्णाम्बरावृतैः

prabhāvidbhirmahāvīryairhemakiñjalkasaṁnibhaiḥ ।
tīkṣṇāsipaṭṭiśadharairhemavarṇāmbarāvṛtaiḥ ॥

संयुक्त अनुवाद ↓joint translation ↓

॥ १ · ५४ · २३ ॥
निर्दग्धं तद्बलं सर्वं प्रदीप्तैरिव पावकैः ततोऽस्त्राणि महातेजा विश्वामित्रो मुमोच

nirdagdhaṁ tadbalaṁ sarvaṁ pradīptairiva pāvakaiḥ ।
tato'strāṇi mahātejā viśvāmitro mumoca ha ॥

॥ २२–२३ ॥

'वे वीर महापराक्रमी और तेजस्वी थे। उनके शरीर की कान्ति सुवर्ण तथा केसर के समान थी। वे सुनहरे वस्त्रों से अपने शरीर को ढँके हुए थे। उन्होंने हाथों में तीखे खड्ग और पट्टिश ले रखे थे। प्रज्वलित अग्नि के समान उद्दीप्त होनेवाले उन वीरों ने विश्वामित्र की सारी सेना को भस्म करना आरम्भ किया। तब महातेजस्वी विश्वामित्र ने उनपर बहुत-से अस्त्र छोड़े। उन अस्त्रों की चोट खाकर वे यवन, काम्बोज और बर्बर जाति के योद्धा व्याकुल हो उठे।'

English translation coming soon.

इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे चतुःपञ्चाशः सर्गः ॥ ५४ ॥

इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्य के बालकाण्ड में चौवनवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ५४ ॥