अङ्गदका सम्पातिको पर्वत-शिखरसे नीचे उतारकर उन्हें जटायुके मारे जानेका वृत्तान्त बताना तथा राम-सुग्रीवकी मित्रता एवं वालिवधका प्रसंग सुनाकर अपने आमरण उपवासका कारण निवेदन करना
śokād bhraṣṭasvaramapi śrutvā vānarayūthapāḥ।
śraddadhurnaiva tadvākyaṁ karmaṇā tasya śaṅkitāḥ॥
शोक के कारण सम्पाति का स्वर विकृत हो गया था। उनकी कही हुई बात सुनकर भी वानर-यूथपतियों ने उसपर विश्वास नहीं किया; क्योंकि वे उनके कर्म से शङ्कित थे
English translation coming soon.
te prāyamupaviṣṭāstu dṛṣṭvā gṛdhraṁ plavaṁgamāḥ।
cakrurbuddhiṁ tadā raudrāṁ sarvān no bhakṣayiṣyati॥
आमरण उपवास के लिये बैठे हुए उन वानरों ने उस समय गीध को देखकर यह भयंकर बात सोची, ‘यह हम सबको खा तो नहीं जायगा
English translation coming soon.
sarvathā prāyamāsīnān yadi no bhakṣayiṣyati।
kṛtakṛtyā bhaviṣyāmaḥ kṣipraṁ siddhimito gatāḥ॥
‘अच्छा, हम तो सब प्रकार से मरणान्त उपवास का व्रत लेकर बैठे ही थे। यदि यह पक्षी हमें खा लेगा तो हमारा काम ही बन जायगा। हमें शीघ्र ही सिद्धि प्राप्त हो जायगी’
English translation coming soon.
etāṁ buddhiṁ tataścakruḥ sarve te hariyūthapāḥ।
avatārya gireḥ śṛṅgād gṛdhramāhāṅgadastadā॥
फिर तो उन समस्त वानर-यूथपतियों ने यही निश्चय किया। उस समय गीध को उस पर्वत-शिखर से उतारकर अङ्गद ने कहा—
English translation coming soon.
babhūvarkṣarajo nāma vānarendraḥ pratāpavān।
mamāryaḥ pārthivaḥ pakṣin dhārmikau tasya cātmajau॥
संयुक्त अनुवाद ↓joint translation ↓
sugrīvaścaiva vālī ca putrau ghanabalāvubhau।
loke viśrutakarmābhūd rājā vālī pitā mama॥
‘पक्षिराज! पहले एक प्रतापी वानरराज हो गये हैं, जिनका नाम था ऋक्षरजा! राजा ऋक्षरजा मेरे पितामह लगते थे। उनके दो धर्मात्मा पुत्र हुए—सुग्रीव और वाली। दोनों ही बड़े बलवान् हुए। उनमें से राजा वाली मेरे पिता थे। संसार में अपने पराक्रम के कारण उनकी बड़ी ख्याति थी
English translation coming soon.
rājā kṛtsnasya jagata ikṣvākūṇāṁ mahārathaḥ।
rāmo dāśarathiḥ śrīmān praviṣṭo daṇḍakāvanam॥
संयुक्त अनुवाद ↓joint translation ↓
lakṣmaṇena saha bhrātrā vaidehyā saha bhāryayā।
piturnideśanirato dharmaṁ panthānamāśritaḥ॥
‘आज से कुछ वर्ष पहले इक्ष्वाकुवंश के महारथी वीर दशरथकुमार श्रीमान् रामचन्द्रजी, जो सम्पूर्ण जगत् के राजा हैं, पिता की आज्ञा के पालन में तत्पर हो धर्म-मार्ग का आश्रय ले दण्डकारण्य में आये थे। उनके साथ उनके छोटे भाई लक्ष्मण तथा उनकी धर्मपत्नी विदेहकुमारी सीता भी थीं
English translation coming soon.
tasya bhāryā janasthānād rāvaṇena hṛtā balāt।
rāmasya tu piturmitraṁ jaṭāyurnāma gṛdhrarāṭ॥
संयुक्त अनुवाद ↓joint translation ↓
dadarśa sītāṁ vaidehīṁ hriyamāṇāṁ vihāyasā।
rāvaṇaṁ virathaṁ kṛtvā sthāpayitvā ca maithilīm।
pariśrāntaśca vṛddhaśca rāvaṇena hato raṇe॥
‘जनस्थान में आने पर उनकी पत्नी सीता को रावण ने बलपूर्वक हर लिया। उस समय गृध्रराज जटायु ने, जो उनके पिता के मित्र थे, देखा—रावण आकाशमार्ग से विदेहकुमारी को लिये जा रहा है। देखते ही वे रावण पर टूट पड़े और उसके रथ को नष्ट-भ्रष्ट करके उन्होंने मिथिलेशकुमारी को सुरक्षितरूप से भूमि पर खड़ा कर दिया। किंतु वे वृद्ध तो थे ही। युद्ध करते-करते थक गये और अन्ततोगत्वा रणक्षेत्र में रावण के हाथ से मारे गये
English translation coming soon.
evaṁ gṛdhro hatastena rāvaṇena balīyasā।
saṁskṛtaścāpi rāmeṇa jagāma gatimuttamām॥
‘इस प्रकार महाबली रावण के द्वारा जटायु का वध हुआ। स्वयं श्रीरामचन्द्रजी ने उनका दाह-संस्कार किया और वे उत्तम गति (साकेतधाम को) प्राप्त हुए
English translation coming soon.
tato mama pitṛvyeṇa sugrīveṇa mahātmanā।
cakāra rāghavaḥ sakhyaṁ so'vadhīt pitaraṁ mama॥
‘तदनन्तर श्रीरघुनाथजी ने मेरे चाचा महात्मा सुग्रीव से मित्रता की और उनके कहने से उन्होंने मेरे पिता का वध कर दिया
English translation coming soon.
mama pitrā niruddho hi sugrīvaḥ sacivaiḥ saha।
nihatya vālinaṁ rāmastatastamabhiṣecayat॥
‘मेरे पिता ने मन्त्रियोंसहित सुग्रीव को राज्य-सुख से वञ्चित कर दिया था। इसलिये श्रीरामचन्द्रजी ने मेरे पिता वाली को मारकर सुग्रीव का अभिषेक करवाया
English translation coming soon.
sa rājye sthāpitastena sugrīvo vānareśvaraḥ।
rājā vānaramukhyānāṁ tena prasthāpitā vayam॥
‘उन्होंने ही सुग्रीव को वाली के राज्य पर स्थापित किया। अब सुग्रीव वानरों के स्वामी हैं। मुख्य-मुख्य वानरों के भी राजा हैं। उन्होंने हमें सीता की खोज के लिये भेजा है
English translation coming soon.
evaṁ rāmaprayuktāstu mārgamāṇāstatastataḥ।
vaidehīṁ nādhigacchāmo rātrau sūryaprabhāmiva॥
‘इस तरह श्रीराम से प्रेरित होकर हमलोग इधर-उधर विदेहकुमारी सीता को खोजते-फिरते हैं, किंतु अबतक उनका पता नहीं लगा। जैसे रात में सूर्य की प्रभा का दर्शन नहीं होता, उसी प्रकार हमें इस वन में जानकी का दर्शन नहीं हुआ
English translation coming soon.
te vayaṁ daṇḍakāraṇyaṁ vicitya susamāhitāḥ।
ajñānāt tu praviṣṭāḥ sma dharaṇyā vivṛtaṁ bilam॥
‘हमलोग अपने मन को एकाग्र करके दण्डकारण्य में भलीभाँति खोज करते हुए अज्ञानवश पृथ्वी के एक खुले हुए विवर में घुस गये
English translation coming soon.
mayasya māyāvihitaṁ tad bilaṁ ca vicinvatām।
vyatītastatra no māso yo rājñā samayaḥ kṛtaḥ॥
‘वह विवर मयासुर की माया से निर्मित हुआ है। उसमें खोजते-खोजते हमारा एक मास बीत गया, जिसे राजा सुग्रीव ने हमारे लौटने के लिये अवधि निश्चित किया था
English translation coming soon.
te vayaṁ kapirājasya sarve vacanakāriṇaḥ।
kṛtāṁ saṁsthāmatikrāntā bhayāt prāyamupāsitāḥ॥
‘हम सब लोग कपिराज सुग्रीव के आज्ञाकारी हैं, किंतु उनके द्वारा नियत की हुई अवधि को लाँघ गये हैं। अतः उन्हींके भय से हम यहाँ आमरण उपवास कर रहे हैं
English translation coming soon.
kruddhe tasmiṁstu kākutsthe sugrīve ca salakṣmaṇe।
gatānāmapi sarveṣāṁ tatra no nāsti jīvitam॥
‘ककुत्स्थकुलभूषण श्रीराम, लक्ष्मण और सुग्रीव तीनों हमपर कुपित होंगे। उस दशा में वहाँ लौट जाने के बाद भी हम सबके प्राण नहीं बच सकते’
English translation coming soon.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे सप्तपञ्चाशः सर्गः॥ ५७ ॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके किष्किन्धाकाण्डमें सत्तावनवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ५७ ॥