वाल्मीकि रामायणम् · अरण्यकाण्डम्Araṇya Kāṇḍa

अरण्यकाण्डम्Araṇya Kāṇḍa

सर्गः १९ · २६ श्लोकाःSarga 19 · 26 ślokas

शूर्पणखाके मुखसे उसकी दुर्दशाका वृत्तान्त सुनकर क्रोधमें भरे हुए खरका श्रीराम आदिके वधके लिये चौदह राक्षसोंको भेजना

अरण्यकाण्डम् · सर्गः १९ — painting

॥ ३ · १९ · २१–२६ ॥

जनस्थाने दीपज्वालाभासिते रणसभायां क्रुद्धो राक्षसाधिपः खरः—एकशीर्षो रत्नमुकुटी ताम्रवर्णः कवची—क्रोधेन उत्थाय वनं प्रति बाहुम् आदेशार्थं प्रसारयति; पुरतः छिन्ननासाकर्णा रुधिराक्ता शूर्पणखा रुदती नखराकरेण पञ्चवटीदिशं दर्शयति; वामतः चतुर्दश उग्राः कवचिनः शूलखड्गधनुर्गदाधरा राक्षसयोधाः सम्मुखम् उद्यताः।

जनस्थान की मशाल-प्रकाशित रणसभा में क्रुद्ध राक्षसराज खर—एक ही मस्तक, रत्नमुकुट, ताम्रवर्ण देह और कवचधारी—क्रोध से उठकर वन की ओर आदेश देते हुए भुजा फैलाते हैं; सामने कटे नाक-कानवाली, रक्त से सनी शूर्पणखा रोती हुई अपने नख भरे हाथ से पञ्चवटी की दिशा दिखा रही है; बायीं ओर चौदह भयंकर कवचधारी राक्षस-योद्धा शूल, तलवार, धनुष और गदा लिये सम्मुख उमड़ पड़े हैं।

In his torchlit forest war-court the enraged demon-warlord Khara, single-headed and jewel-crowned in dark armour, surges up and flings out an arm in command toward the forest; before him the mutilated Shurpanakha, nose and ears cut away and smeared with blood, crouches weeping and points a clawed hand toward Panchavati, while to the left fourteen fierce armoured rakshasa warriors mass forward with swords, spears, bows and maces.

॥ ३ · १९ · १ ॥
तां तथा पतितां दृष्ट्वा विरूपां शोणितोक्षिताम्। भगिनीं क्रोधसंतप्तः खरः पप्रच्छ राक्षसः॥

tāṁ tathā patitāṁ dṛṣṭvā virūpāṁ śoṇitokṣitām।
bhaginīṁ krodhasaṁtaptaḥ kharaḥ papraccha rākṣasaḥ॥

अपनी बहिन को इस प्रकार अङ्गहीन और रक्त से भीगी हुई अवस्था में पृथ्वी पर पड़ी देख राक्षस खर क्रोध से जल उठा और इस प्रकार पूछने लगा—

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · २ ॥
उत्तिष्ठ तावदाख्याहि प्रमोहं जहि सम्भ्रमम्। व्यक्तमाख्याहि केन त्वमेवंरूपा विरूपिता॥

uttiṣṭha tāvadākhyāhi pramohaṁ jahi sambhramam।
vyaktamākhyāhi kena tvamevaṁrūpā virūpitā॥

‘बहिन उठो और अपना हाल बताओ। मूर्च्छा और घबराहट छोड़ो तथा साफ-साफ कहो, किसने तुम्हें इस तरह रूपहीन बनाया है?

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · ३ ॥
कः कृष्णसर्पमासीनमाशीविषमनागसम्। तुदत्यभिसमापन्नमङ्गुल्यग्रेण लीलया॥

kaḥ kṛṣṇasarpamāsīnamāśīviṣamanāgasam।
tudatyabhisamāpannamaṅgulyagreṇa līlayā॥

‘कौन अपने सामने आकर चुपचाप बैठे हुए निरपराध एवं विषैले काले साँप को अपनी अँगुलियों के अग्रभाग से खेल-खेल में पीड़ा दे रहा है?

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · ४ ॥
कालपाशं समासज्य कण्ठे मोहान्न बुध्यते। यस्त्वामद्य समासाद्य पीतवान् विषमुत्तमम्॥

kālapāśaṁ samāsajya kaṇṭhe mohānna budhyate।
yastvāmadya samāsādya pītavān viṣamuttamam॥

‘जिसने आज तुम पर आक्रमण करके तुम्हारे नाक-कान काटे हैं, उसने उच्चकोटि का विष पी लिया है तथा अपने गले में काल का फंदा डाल लिया है, फिर भी मोहवश वह इस बात को समझ नहीं रहा है

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · ५ ॥
बलविक्रमसम्पन्ना कामगा कामरूपिणी। इमामवस्थां नीता त्वं केनान्तकसमागता॥

balavikramasampannā kāmagā kāmarūpiṇī।
imāmavasthāṁ nītā tvaṁ kenāntakasamāgatā॥

‘तुम तो स्वयं ही दूसरे प्राणियों के लिये यमराज के समान हो, बल और पराक्रम से सम्पन्न हो तथा इच्छानुसार सर्वत्र विचरने और अपनी रुचि के अनुसार रूप धारण करने में समर्थ हो, फिर भी तुम्हें किसने इस दुरवस्था में डाला है; जिससे दुःखी होकर तुम यहाँ आयी हो?

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · ६ ॥
देवगन्धर्वभूतानामृषीणां महात्मनाम्। कोऽयमेवं महावीर्यस्त्वां विरूपां चकार ह॥

devagandharvabhūtānāmṛṣīṇāṁ ca mahātmanām।
ko'yamevaṁ mahāvīryastvāṁ virūpāṁ cakāra ha॥

‘देवताओं, गन्धर्वों, भूतों तथा महात्मा ऋषियों में यह कौन ऐसा महान् बलशाली है, जिसने तुम्हें रूपहीन बना दिया?

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · ७ ॥
नहि पश्याम्यहं लोके यः कुर्यान्मम विप्रियम्। अमरेषु सहस्राक्षं महेन्द्रं पाकशासनम्॥

nahi paśyāmyahaṁ loke yaḥ kuryānmama vipriyam।
amareṣu sahasrākṣaṁ mahendraṁ pākaśāsanam॥

‘संसार में तो मैं किसीको ऐसा नहीं देखता, जो मेरा अप्रिय कर सके। देवताओं में सहस्रनेत्रधारी पाकशासन इन्द्र भी ऐसा साहस कर सकें, यह मुझे नहीं दिखायी देता

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · ८ ॥
अद्याहं मार्गणैः प्राणानादास्ये जीवितान्तगैः। सलिले क्षीरमासक्तं निष्पिबन्निव सारसः॥

adyāhaṁ mārgaṇaiḥ prāṇānādāsye jīvitāntagaiḥ।
salile kṣīramāsaktaṁ niṣpibanniva sārasaḥ॥

‘जैसे हंस जल में मिले हुए दूध को पी लेता है, उसी प्रकार मैं आज इन प्राणान्तकारी बाणों से तुम्हारे अपराधी के शरीर से उसके प्राण ले लूँगा

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · ९ ॥
निहतस्य मया संख्ये शरसंकृत्तमर्मणः। सफेनं रुधिरं कस्य मेदिनी पातुमिच्छति॥

nihatasya mayā saṁkhye śarasaṁkṛttamarmaṇaḥ।
saphenaṁ rudhiraṁ kasya medinī pātumicchati॥

‘युद्ध में मेरे बाणों से जिसके मर्मस्थान छिन्न-भिन्न हो गये हैं तथा जो मेरे हाथों मारा गया है, ऐसे किस पुरुष के फेनसहित गरम-गरम रक्त को यह पृथ्वी पीना चाहती है?

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · १० ॥
कस्य पत्ररथाः कायान्मांसमुत्कृत्य संगताः। प्रहृष्टा भक्षयिष्यन्ति निहतस्य मया रणे॥

kasya patrarathāḥ kāyānmāṁsamutkṛtya saṁgatāḥ।
prahṛṣṭā bhakṣayiṣyanti nihatasya mayā raṇe॥

‘रणभूमि में मेरे द्वारा मारे गये किस व्यक्ति के शरीर से मांस कुतर-कुतरकर ये हर्ष में भरे हुए झुंड-के-झुंड पक्षी खायँगे?

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · ११ ॥
तं देवा गन्धर्वा पिशाचा राक्षसाः। मयापकृष्टं कृपणं शक्तास्त्रातुं महाहवे॥

taṁ na devā na gandharvā na piśācā na rākṣasāḥ।
mayāpakṛṣṭaṁ kṛpaṇaṁ śaktāstrātuṁ mahāhave॥

‘जिसे मैं महासमर में खींच लूँ, उस दीन अपराधी को देवता, गन्धर्व, पिशाच और राक्षस भी नहीं बचा सकते

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · १२ ॥
उपलभ्य शनैः संज्ञां तं मे शंसितुमर्हसि। येन त्वं दुर्विनीतेन वने विक्रम्य निर्जिता॥

upalabhya śanaiḥ saṁjñāṁ taṁ me śaṁsitumarhasi।
yena tvaṁ durvinītena vane vikramya nirjitā॥

‘धीरे-धीरे होश में आकर तुम मुझे उसका नाम बताओ, जिस उद्दण्ड ने वन में तुम पर बलपूर्वक आक्रमण करके तुम्हें परास्त किया है’

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · १३ ॥
इति भ्रातुर्वचः श्रुत्वा क्रुद्धस्य विशेषतः। ततः शूर्पणखा वाक्यं सबाष्पमिदमब्रवीत्॥

iti bhrāturvacaḥ śrutvā kruddhasya ca viśeṣataḥ।
tataḥ śūrpaṇakhā vākyaṁ sabāṣpamidamabravīt॥

भाई का विशेषतः क्रोध में भरे हुए भाई खर का यह वचन सुनकर शूर्पणखा नेत्रों से आँसू बहाती हुई इस प्रकार बोली—

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · १४ ॥
तरुणौ रूपसम्पन्नौ सुकुमारौ महाबलौ। पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ॥

taruṇau rūpasampannau sukumārau mahābalau।
puṇḍarīkaviśālākṣau cīrakṛṣṇājināmbarau॥

‘भैया! वन में दो तरुण पुरुष आये हैं, जो देखने में बड़े ही सुकुमार, रूपवान् और महान् बलवान् हैं। उन दोनों के बड़े-बड़े नेत्र ऐसे जान पड़ते हैं मानो खिले हुए कमल हों। वे दोनों ही वल्कल-वस्त्र और मृगचर्म पहने हुए हैं

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · १५ ॥
फलमूलाशनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ। पुत्रौ दशरथस्यास्तां भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ॥

phalamūlāśanau dāntau tāpasau brahmacāriṇau।
putrau daśarathasyāstāṁ bhrātarau rāmalakṣmaṇau॥

‘फल और मूल ही उनका भोजन है। वे जितेन्द्रिय, तपस्वी और ब्रह्मचारी हैं। दोनों ही राजा दशरथ के पुत्र और आपस में भाई-भाई हैं। उनके नाम राम और लक्ष्मण हैं

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · १६ ॥
गन्धर्वराजप्रतिमौ पार्थिवव्यञ्जनान्वितौ। देवौ वा दानवावेतौ तर्कयितुमुत्सहे॥

gandharvarājapratimau pārthivavyañjanānvitau।
devau vā dānavāvetau na tarkayitumutsahe॥

‘वे दो गन्धर्वराजों के समान जान पड़ते हैं और राजोचित लक्षणों से सम्पन्न हैं। ये दोनों भाई देवता अथवा दानव हैं, यह मैं अनुमान से भी नहीं जान सकती

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · १७ ॥
तरुणी रूपसम्पन्ना सर्वाभरणभूषिता। दृष्टा तत्र मया नारी तयोर्मध्ये सुमध्यमा॥

taruṇī rūpasampannā sarvābharaṇabhūṣitā।
dṛṣṭā tatra mayā nārī tayormadhye sumadhyamā॥

‘उन दोनों के बीच में एक तरुण अवस्थावाली रूपवती स्त्री भी वहाँ देखी है, जिसके शरीर का मध्यभाग बड़ा ही सुन्दर है। वह सब प्रकार के आभूषणों से विभूषित है

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · १८ ॥
ताभ्यामुभाभ्यां सम्भूय प्रमदामधिकृत्य ताम्। इमामवस्थां नीताहं यथानाथासती तथा॥

tābhyāmubhābhyāṁ sambhūya pramadāmadhikṛtya tām।
imāmavasthāṁ nītāhaṁ yathānāthāsatī tathā॥

‘उस स्त्री के ही कारण उन दोनों ने मिलकर मेरी एक अनाथ और कुलटा स्त्री की भाँति ऐसी दुर्गति की है

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · १९ ॥
तस्याश्चानृजुवृत्तायास्तयोश्च हतयोरहम्। सफेनं पातुमिच्छामि रुधिरं रणमूर्धनि॥

tasyāścānṛjuvṛttāyāstayośca hatayoraham।
saphenaṁ pātumicchāmi rudhiraṁ raṇamūrdhani॥

‘मैं युद्ध में उस कुटिल आचारवाली स्त्री के और उन दोनों राजकुमारों के भी मारे जाने पर उनका फेनसहित रक्त पीना चाहती हूँ

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · २० ॥
एष मे प्रथमः कामः कृतस्तत्र त्वया भवेत्। तस्यास्तयोश्च रुधिरं पिबेयमहमाहवे॥

eṣa me prathamaḥ kāmaḥ kṛtastatra tvayā bhavet।
tasyāstayośca rudhiraṁ pibeyamahamāhave॥

‘रणभूमि में उस स्त्री का और उन पुरुषों का भी रक्त मैं पी सकूँ—यह मेरी पहली और प्रमुख इच्छा है, जो तुम्हारे द्वारा पूर्ण की जानी चाहिये

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · २१ ॥
इति तस्यां ब्रुवाणायां चतुर्दश महाबलान्। व्यादिदेश खरः क्रुद्धो राक्षसानन्तकोपमान्॥

iti tasyāṁ bruvāṇāyāṁ caturdaśa mahābalān।
vyādideśa kharaḥ kruddho rākṣasānantakopamān॥

शूर्पणखा के ऐसा कहने पर खर ने कुपित होकर अत्यन्त बलवान् चौदह राक्षसों को, जो यमराज के समान भयंकर थे, यह आदेश दिया—

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · २२ ॥
मानुषौ शस्त्रसम्पन्नौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ। प्रविष्टौ दण्डकारण्यं घोरं प्रमदया सह॥

mānuṣau śastrasampannau cīrakṛṣṇājināmbarau।
praviṣṭau daṇḍakāraṇyaṁ ghoraṁ pramadayā saha॥

‘वीरो! इस भयंकर दण्डकारण्य के भीतर चीर और काला मृगचर्म धारण किये दो शस्त्रधारी मनुष्य एक युवती स्त्री के साथ घुस आये हैं

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · २३ ॥
तौ हत्वा तां दुर्वृत्तामुपावर्तितुमर्हथ। इयं भगिनी तेषां रुधिरं मम पास्यति॥

tau hatvā tāṁ ca durvṛttāmupāvartitumarhatha।
iyaṁ ca bhaginī teṣāṁ rudhiraṁ mama pāsyati॥

‘तुमलोग वहाँ जाकर पहले उन दोनों पुरुषों को मार डालो; फिर उस दुराचारिणी स्त्री के भी प्राण ले लो। मेरी यह बहिन उन तीनों का रक्त पीयेगी

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · २४ ॥
मनोरथोऽयमिष्टोऽस्या भगिन्या मम राक्षसाः। शीघ्रं सम्पाद्यतां गत्वा तौ प्रमथ्य स्वतेजसा॥

manoratho'yamiṣṭo'syā bhaginyā mama rākṣasāḥ।
śīghraṁ sampādyatāṁ gatvā tau pramathya svatejasā॥

‘राक्षसो! मेरी इस बहिन का यह प्रिय मनोरथ है। तुम वहाँ जाकर अपने प्रभाव से उन दोनों मनुष्यों को मार गिराओ और बहिन के इस मनोरथ को शीघ्र पूरा करो

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · २५ ॥
युष्माभिर्निहतौ दृष्ट्वा तावुभौ भ्रातरौ रणे। इयं प्रहृष्टा मुदिता रुधिरं युधि पास्यति॥

yuṣmābhirnihatau dṛṣṭvā tāvubhau bhrātarau raṇe।
iyaṁ prahṛṣṭā muditā rudhiraṁ yudhi pāsyati॥

‘रणभूमि में उन दोनों भाइयों को तुम्हारे द्वारा मारा गया देख यह हर्ष से खिल उठेगी और आनन्दमग्न होकर युद्धस्थल में उनका रक्त पान करेगी’

English translation coming soon.

॥ ३ · १९ · २६ ॥
इति प्रतिसमादिष्टा राक्षसास्ते चतुर्दश। तत्र जग्मुस्तया सार्धं घना वातेरिता इव॥

iti pratisamādiṣṭā rākṣasāste caturdaśa।
tatra jagmustayā sārdhaṁ ghanā vāteritā iva॥

खर की ऐसी आज्ञा पाकर वे चौदहों राक्षस हवा के उड़ाये हुए बादलों के समान विवश हो शूर्पणखा के साथ पञ्चवटी को गये

English translation coming soon.

इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽरण्यकाण्डे एकोनविंशः सर्गः ॥ १९ ॥

इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अरण्यकाण्डमें उन्नीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १९ ॥